Monday, November 16, 2009

धन्य है यह देश...... पी.सी.गोदियाल


बहुत साल पहले चिरंजन पार्क नै दिल्ली में एक आफिस कम गोदाम खोलने के लिए मकान देख रहे थे ! एजेंट एक बंगाली परिवार के घर में ले गया, घर वालो ने जिसमे एक ६०-६५ साल की विरध महिला भी थी माकन का पिछला हिस्सा दिखाया ! वहा जब एक कमरे में हम गए तो कोने पर एक वृद्ध लेटा था ! हमने कहा कि हमें अगले महीने की पहली तारीख से मकान चाहिए , मगर यहाँ ये विरध है इन्हें आप .. मेरी बात बीच में ही काटते हुए घर का बेटा बोला... वो हो जाएगा, पाप्पा को कैंसर है और डाक्टर ने कहा है कि दो हफ्ते से ज्यादा नहीं जी............. उसके बात सुन मै हक्का बक्का रह गया, और मेरे मुख से निकला धन्य है यह देश...... बेटा मकान किराये पर देने के लिए डाक्टर की भविष्यबाणी के सही निकलने की दुआ कर रहा था !

Virus lover baba

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